शिमला — हिमाचल प्रदेश के गांवों में चुनावी हलचल एक बार फिर तेज होने वाली है। अदालती आदेशों और लंबी देरी के बाद, राज्य सरकार ने आखिरकार पंचायत चुनावों के लिए वार्डबंदी (Delimitation) का आधिकारिक कार्यक्रम जारी कर दिया है। पंचायती राज विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, वार्डों के पुनर्गठन और आरक्षण तय करने की पूरी प्रक्रिया 31 मार्च, 2026 तक निपटा ली जाएगी।
यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस हालिया आदेश के बाद उठाया गया है, जिसमें राज्य सरकार और चुनाव आयोग को सख्त हिदायत दी गई थी कि चुनाव करवाने की सारी तैयारियां 31 मार्च तक पूरी कर ली जाएं, ताकि 31 मई तक हर हाल में चुनाव संपन्न हो सकें।
क्या है पूरा शेड्यूल? प्रशासन अब ‘मिशन मोड’ में काम करेगा। सबसे पहले वार्डों की नई सीमाएं तय करने के लिए ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।
- आपत्तियों का मौका: प्रशासन पहले वार्डबंदी का कच्चा चिट्ठा (Draft Proposal) लोगों के सामने रखेगा। अगर किसी ग्रामीण को लगता है कि उनका वार्ड गलत तरीके से बांटा गया है, तो वे अपनी आपत्ति दर्ज करवा सकेंगे।
- सुनावनी और फैसला: इन आपत्तियों का निपटारा डीसी (DC) और संबंधित अधिकारी करेंगे।
- आरक्षण रोस्टर: सबसे अहम पड़ाव 31 मार्च का दिन होगा। इसी दिन फाइनल आरक्षण रोस्टर जारी होगा, जिससे यह तय होगा कि कौन सी सीट महिला, एससी (SC) या एसटी (ST) के लिए आरक्षित होगी और कौन सी ओपन रहेगी।
गाँवों में शुरू होगी सियासत गौरतलब है कि पंचायतों का कार्यकाल जनवरी 2026 में ही खत्म हो चुका है। सरकार ने पिछले साल की आपदा और अन्य कारणों का हवाला देकर चुनाव टालने की कोशिश की थी, लेकिन हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने इसे ज्यादा लंबा खींचने से मना कर दिया।
अब जैसे ही 31 मार्च को यह साफ होगा कि प्रधानी की सीट किसके खाते में गई है, वैसे ही असली चुनावी दंगल शुरू हो जाएगा। फिलहाल, भावी उम्मीदवारों की नजरें वार्डबंदी की नई लकीरों पर टिकी हैं।
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