पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने अपनी किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर चल रहे भारी विवाद के बीच अपनी चुप्पी तोड़ दी है। मंगलवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने पब्लिशर ‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया’ का एक आधिकारिक बयान साझा किया। इस बयान में साफ तौर पर कहा गया है कि यह किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है और बाजार में इसका कोई भी संस्करण—चाहे वह प्रिंट हो या डिजिटल—उपलब्ध नहीं है।
यह पूरा मामला तब गरमाया जब संसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस किताब का हवाला देते हुए मोदी सरकार पर तीखे हमले किए। राहुल गांधी ने संसद में किताब की कथित कॉपी लहराते हुए आरोप लगाया कि सरकार गलवान झड़प और अग्निपथ योजना की सच्चाई छिपाने के लिए इस किताब को रोक रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किताब प्रकाशित नहीं हुई है, तो जनरल नरवणे ने 2023 में इसे “अब उपलब्ध” क्यों बताया था?
इस सियासी वार-पलटवार के बीच पेंगुइन ने स्पष्टीकरण जारी कर कहा कि किताब अभी “प्रकाशन की प्रक्रिया” में नहीं गई है। पब्लिशर ने चेतावनी भी दी कि सोशल मीडिया या व्हाट्सएप पर जो भी पीडीएफ (PDF) या हिस्सा वायरल हो रहा है, वह गैरकानूनी है और कॉपीराइट का उल्लंघन है। जनरल नरवणे द्वारा इस नोट को शेयर करना यह संकेत देता है कि वे खुद को इन “लीक” हुई कॉपियों से अलग रखना चाहते हैं और आधिकारिक प्रक्रिया का सम्मान कर रहे हैं।
दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। पुलिस की स्पेशल सेल अब यह जांच कर रही है कि रक्षा मंत्रालय से मंजूरी मिले बिना इस अति-संवेदनशील किताब का ड्राफ्ट लीक कैसे हुआ। सियासी गलियारों में चर्चा है कि क्या वाकई इस किताब में ऐसे राज दफन हैं जो सरकार के लिए असहज हो सकते हैं, या यह महज प्रकाशन से पहले की प्रक्रिया का हिस्सा है। फिलहाल, किताब अटकी हुई है और सियासत जारी है।
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