शिमला/नई दिल्ली – हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह और प्रदेश की नौकरशाही (IAS/IPS अधिकारियों) के बीच का विवाद अब तूल पकड़ चुका है। शिमला की पहाड़ियों में शुरू हुई यह सियासी तपिश अब दिल्ली तक महसूस की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस हाईकमान को हस्तक्षेप करना पड़ा है।
दिल्ली में बैठकों का दौर सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पहले से ही दिल्ली में मौजूद हैं, जहां उन्होंने हिमाचल कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला से लंबी मंत्रणा की है। खबरों की मानें तो इस विवाद को सुलझाने के लिए हाईकमान ने सख्त रुख अपनाया है। बताया जा रहा है कि विक्रमादित्य सिंह भी अपना पक्ष रखने के लिए दिल्ली में मौजूद हैं या संपर्क में हैं।
अफसरशाही की नाराजगी भारी विवाद का कारण विक्रमादित्य सिंह द्वारा सोशल मीडिया और बयानों में कुछ अधिकारियों की निष्ठा पर सवाल उठाना है। इससे प्रदेश की आईएएस और आईपीएस लॉबी खासी नाराज है। अधिकारी संघ ने दो टूक कहा है कि बिना वजह अफसरों को निशाना बनाना और “गद्दार” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना स्वीकार्य नहीं है। यदि यह नहीं रुका, तो अधिकारी ‘पेन-डाउन’ (काम रोको) जैसा कदम भी उठा सकते हैं, जिससे सरकार का कामकाज ठप हो सकता है।
सरकार की स्थिरता पर सवाल राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह विवाद सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार के भीतर चल रही गुटबाजी (सुक्खू गुट बनाम होली लॉज) का भी नतीजा है। हाईकमान अब दोनों पक्षों को शांत कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में जुटा है ताकि लोकसभा चुनाव से पहले सरकार की छवि खराब न हो।
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